
रूडकी (ग्रामीण तहकीकात)। मंगलौर की अगर बात करें तो कभी मंगलौर को आम की उत्तम फ़सल में से एक माना जाता था यहाँ मंगलौर के चारों और आम के बड़े बड़े बाग देखने को मिलते थे पर अब उद्यान विभाग और वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते एक एक कर मंगलौर से आम के हरे भरे फल दार पेड़ो को वन माफियाओं द्वारा प्रतिदिन काटा जा रहा है। हालांकि अक्सर देखने को मिलता है। कि इन काटे जाने वाले पेड़ो की वन माफियाओं के पास परमिशन भी नही होती। क्योंकि कहावत है जब सैयां भय कोतवाल तो डर काहे का , इसी का फायदा मंगलौर क्षेत्र के वन माफिया उठाते हुए दिन रात आम के हरे भरे पेड़ो पर आरी चला रहे है। हाल में ही मंगलौर के लंढौरा रोड पर वन माफियाओं ने दो ही दिनों के अंदर आम के लगभग 30 पेड़ो को काट डाला।

वही जब इसकी सूचना मीडिया तक पहुँची तो वहाँ पर बस पेड़ो की जड़ो और कुछ पत्तो के अलावा कुछ नही मिला और तो और वन माफियाओं ने वहाँ हल बहा कर ज़मीन को समतल दिखाने का प्रयास भी किया। वहीं नारसन ब्लॉक में बैठने वाले उद्यान अधिकारी नरेश कुमार की पूरे मामले की सूचना दी गई पर वह व्यवस्त होने की बात कहकर आज तक मामले को टालते आ रहे है। वही हरिद्वार जिला उद्यान अधिकारी तेजपाल से इस मामले में जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने भी किसी तरह की कोई जानकारी देने से साफ मना कर दिया। अब जब इसी मामले में वन विभाग द्वारा मंगलौर वन चौकी में मौजूद धीरज राणा से पेड़ो के सम्बंध में जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने भी पूरे मामले को लेकर अनभिज्ञता ज़ाहिर की यह सब साफ जाहिर हो चुका है। सभी अधिकारी मामले से साफ बचते नज़र आ रहे है। और दस दिन बीत जाने के बाद भी किसी भी वन माफिया के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की गई।
लेखराज सैनी (कार्यकर्ता हिन्दू संगठन मंगलौर)
वही अब हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता लेखराज सैनी ने वन माफियाओं और वन अधिकारियों के खिलाफ आवाज़ बुलंद करते हुए बताया कि मंगलौर में जो वन माफिया अपनी भूमिका निभा रहे है। उसमें संबंधित अधिकारियों का बड़ा हाथ है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इन वन माफियाओं के साथ साथ इन भृष्ट अधिकारियों पर कौन और क्या कार्यवाही करेगा।