नारसन (दैनिक ग्रामीण तहकीकात): विकासखंड नारसन में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार का ऐसा ‘सेफ हाउस’ बन गई है, जहाँ कागजी मजदूरों की फौज खड़ी कर सरकारी खजाने पर दिन-दहाड़े (या कहें कि रात के अंधेरे में) डाका डाला जा रहा है। “दैनिक ग्रामीण तहकीकात” के पास मौजूद साक्ष्य विकासखंड के अधिकारियों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह बेनकाब कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार का ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ गणित
ग्राम पंचायत बुक्कनपुर में मस्टरोल संख्या 4163 से 4171 तक का जो खेल चल रहा है, उसका गणित चौंकाने वाला है। पोर्टल पर कुल 257 मजदूरों की उपस्थिति दर्शाई गई है। उत्तराखण्ड सरकार की वर्तमान मजदूरी दर ₹252 प्रतिदिन के हिसाब से इन 15 दिनों का कुल बजट ₹9,71,460 बैठता है। लगातार 11 दिनों से धरातल पर बिना एक भी मजदूर के, कागजों में ‘P’ (Present) भरकर सीधे तौर पर करीब 10 लाख रुपये के गबन की सुनियोजित साजिश रची गई है।
रात 7 बजे के बाद का वो ‘डिजिटल सबूत’ जिसने मचाया हड़कंप
मनरेगा के NMMS नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए, जहाँ हाजिरी सुबह 6 से 11 बजे के बीच होनी चाहिए, वहीं बुक्कनपुर में यह खेल रात 07:28 बजे खेला जा रहा है। हमारे पास मौजूद स्क्रीनशॉट इस बात का ‘प्रमाण‘ है कि रात के अंधेरे में बैठकर पोर्टल पर फर्जी हाजिरी चढ़ाई जा रही है, ताकि दिन में किसी भी सरकारी सर्वे टीम की आंखों में धूल झोंकी जा सके।
बी.डी.ओ. साहब की ‘रहस्यमयी’ चुप्पी
इस महाघोटाले के संबंध में जब बीडीओ सुभाष सैनी से संपर्क किया गया, तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया। एक जिम्मेदार अधिकारी की यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है:
- क्या यह 10 लाख की लूट अधिकारियों के संरक्षण में हो रही है?
- 11 दिनों से चल रहे इस ‘कागजी खेल’ की भनक विभाग को क्यों नहीं लगी?
- रात के समय हाजिरी लगाने वाले दोषियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
चेतावनी: हमारे पास कार्यस्थल के वो वीडियो फुटेज और फोटोग्राफ्स मौजूद हैं, जहाँ लोकेशन मस्टरोल में ‘ऑन’ है लेकिन धरातल पर ‘सन्नाटा’ है। यदि जल्द ही इस पर उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो इन साक्ष्यों को सीधे शासन और विजिलेंस विभाग को सौंपा जाएगा।
दैनिक ग्रामीण तहकीकात समाचार पत्र के अगले अंक में प्रमुखता से छापी जाएगी खबर