रुड़की (नारसन)। क्षेत्र के मुड़लाना, सढ़ोली और मंगलौर में अब्दुल कलाम चौक स्थित हयात अस्पताल के पीछे फलदार आम के पेड़ों के अवैध कटान का एक बड़ा काला खेल सामने आया है। विकास की आड़ में पर्यावरण का गला घोंटा जा रहा है, और हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार विभाग गहरी नींद में सोया है।
परमिशन चंद पेड़ों की, काट दिए पूरे बाग
स्थानीय ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि लकड़ी माफियाओं ने विभाग से महज कुछ चुनिंदा पेड़ों को काटने की अनुमति ली थी। लेकिन इस कागजी अनुमति की आड़ में पूरे के पूरे हरे-भरे बागों को काटकर मैदान में तब्दील कर दिया गया। सरकारी नियमों के मुताबिक, फलदार पेड़ों को काटने पर भारी जुर्माना और उसके बदले नए पौधे (क्षतिपूरक वृक्षारोपण) लगाने का सख्त प्रावधान है, लेकिन यहाँ नियमों को ठेंगे पर रखा जा रहा है।
सवालों के घेरे में विभाग: ‘थोड़ी देर में बात करता हूँ’ वाला रवैया
इस पूरे प्रकरण में उद्यान विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जब एडीओ नारसन प्रताप सिंह से इस संबंध में जानकारी चाही गई, तो उन्होंने संतोषजनक जवाब देना उचित नहीं समझा।
वहीं, जिला उद्यान अधिकारी तेजपाल सिंह पिछले कई दिनों से मामले को टाल रहे हैं। मीडिया के सवालों पर उनका एक ही रटा-रटाया जवाब होता है— “थोड़ी देर में बात करता हूँ”।
बड़ा सवाल: आखिर किसे बचा रहा है विभाग?
अधिकारियों की यह टालमटोल और रहस्यमयी चुप्पी कई संदेह पैदा करती है:
- मौके पर कुल कितने पेड़ थे और असल में कितने काटे गए?
- बिना अनुमति काटे गए पेड़ों पर अब तक कितना जुर्माना वसूला गया?
- क्या माफियाओं को विभाग का मौन संरक्षण प्राप्त है?
यदि उच्चाधिकारियों ने इस ओर जल्द ध्यान नहीं दिया, तो क्षेत्र का हरित आवरण पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। पर्यावरण प्रेमियों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
ब्यूरो रिपोर्ट: ग्रामीण तहकीकात