संवाददाता अरविंद साकेत +91 62661 14236
सिंगरौली (ग्रामीण तहकीकात)। हजारों यात्रियों की आवाजाही का मुख्य केंद्र रहने वाला सरई रेलवे स्टेशन इन दिनों आम जनता की सुविधा के बजाय उद्योगपतियों के कोल भंडारण का अड्डा बन चुका है, जिससे पूरा परिसर यात्रियों के लिए नरक के समान हो गया है। स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर कोल यार्ड स्थापित किए जाने से चारों ओर कोयले की धूल (डस्ट) की मोटी परत जमी हुई है, जिसके कारण प्लेटफार्म पर रखी कुर्सियों से लेकर प्रतीक्षालय तक गंदगी का अंबार लगा है और बुजुर्गों, महिलाओं व बच्चों को यहां चंद मिनट रुकना भी भारी पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थल पर कोयले का भंडारण यात्रियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, जिसे स्टेशन परिसर से दूर भी किया जा सकता था, लेकिन रसूखदार उद्योगपतियों के सामने रेल प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि मूकदर्शक बने हुए हैं। इस गंभीर अव्यवस्था के संबंध में जब ‘दैनिक ग्रामीण तहकीकात’ के संवाददाता ने स्टेशन मास्टर से उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने कैमरे और सवालों के सामने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया, जिससे रेल विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आम जनता अब प्रशासन से यह सवाल पूछ रही है कि आखिर किस नियम के तहत यात्री सुविधाओं की बलि चढ़ाकर प्लेटफार्म पर कोल यार्ड को अनुमति दी गई है; ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्टेशन से कोयले का भंडारण नहीं हटाया गया तो वे आंदोलन को विवश होंगे।