भारतवासी हूँ मैं हिन्दी मेरी भाषा हैं
हिन्दी, हिन्दुस्तान अमर रहे यही मेरी अभिलाषा है
____लेखक अन्नू त्रिपाठी
मधुबन मे खड़ी राधा रानी नैनो को करके कजरारी बार बार रही तुम्हे पुकारी आ जाओ अब हे गिरधारी
द्रोपदी खड़ी है सभा के बीच दूसासन चीर रहे हैं खींच भाई भाई कह तुम्हे पुकारी बचालो आकर लाज हमारी आ जाओ अब हे गिरधारी
है प्रीत की तुझसे लगन लगी प्रेम पत्र लिख रही रूक्मिणी जबसे प्रित की डोर है तुझ संग बांधी नैन रहे तेरी बाट निहारी आ जाओ अब हे गिरधारी
_____ लेखक अन्नू त्रिपाठी
सात वचन जो दिए है तुमको सातो जनम निभाऊंगा ए सनम सजन होने का मैं हर एक फर्ज निभाऊंगा पर जिस माँ बाप ने मेरे लिए दर दर ठोकर खाया है तेरे लिए ए सनम उन्हें मैं कभी नहीं ठुकराऊं
_____ लेखक अन्नू त्रिपाठी
– बेटियों पर कविता
ऐ मेरी प्यारी गुड़िया जीवन से भरी,
खुशियो की कड़ी जब से आई तू मेरे अंगना।
मेरे भाग्य खुले घर लक्ष्मी बसीऐ,
तेरे मासूम सवालो की लड़ी तोतली जुवा से,
हर एक बोली गुस्से मे कहे या रूठ कर
बोली लगती सुमधुर गीतो से भलीऐ।
घर लौटता शाम थक कर चूर चूर साहब के डाट से,
मन मजबूर सुन कर मेरे दो पहिए की आवाज।
भागी आती तू मेरे पास तेरी पापा पापा की पुकार,
हर लेती सब कर देती नई ऐ।
सोचता हू जब तू बड़ी होगी,
तेरी शादी लगन की घड़ी होगी।
कैसे तुझको बिदा दुंगा,
कैसे खुद को सम्भालुंगा,
सहम जाता हू निबर पाता हूं,
क्यो एैसी रीत बनी जग की ऐ।
___लेखक अन्नू त्रिपाठी
बेटा है कुल दीपक,
जिससे होता एक घर रौशन ।
दो कुल की रोशनी जिससे,
बेटी है घर की रौनक।
सुन लो ऐ दुनिया वालो,
बेटी बोझ नहीं होती,
समझे जो लोग बेटा-बेटी को सामान ,
उनकी निम्न सोच नहीं होती।
बेटा है लाठी बुढ़ापे की,
बस कहने को,
बेटी है वास्तव में
सहारा माता-पिता का।
बेटा अगर है अभिमान,
बेटी गुरुर है माता-पिता का।
बेटे अगर हैं माता-पिता की आँखें ,
तो बेटी उनकी नाक(प्रतिष्ठा) है।
बेटे तो मात्र एक घर /कूल की शान है ।
मगर बेटी दोनों कूलों (ससुराल-पक्ष व् मायका पक्ष ) दोनों की शान हैं।
बेटी होती है पराया धन,
मगर “अपने” बेटे से कहीं अधिक,
अपना होता है वोह पराया धन।
पास रहकर भी जो बेटा,
माता-पिता के कष्टों से रहे अनजान।
मगर सौ कौस की दूरी से भी माता-पिता ,
में जिसके बसते हैं प्राण।
माता-पिता व् बेटी के जुड़े रहे एक तार से मन ,
ऐसी आत्मीयता ,
ऐसी घनिष्ठता सिर्फ एक बेटी ही दे सकती है।
____ लेखक अन्नू त्रिपाठी
आखिर वो कौन है ……….???
चाहती है दिलो-ओ -जान से
मुझ पे वो कितना मरती है
बुनती हर ख्वाब निश दिन
मेरे आसरे वो दम भरती है
नित संध्या बाट निहारे
डयोढ़ी संग खड़ी ताकती है
अब आ रहे होंगे शायद
हर पल बाहर को झांकती है
करती है मांगे नाना प्रकार
कभी हँसती, कभी रूठती है
परवाह करे कोई बाद माँ के
दुआओ में मेरी ख़ुशी मांगती है
खबर मुझे है, ज्ञात उसे भी
उम्र सारी न साथ गुजरनी है
पर जब तक संग एक दूजे के
जिंदगी जन्नत से प्यारी है !!
थका मांदा जब घर लौटता हूँ
मेरी बाहो में वो सिमट जाती है
भूल जाता हूँ उस क्षण दुनिया को
सारे जहां की खुशियाँ मिल जाती है !!
रात दिन उसके ख्वाबो को
साकार करने में मिट मिट जाता हूँ
कैसे रह पाउँगा बिन उसके
जिससे अपना घर रोशन पाता हूँ !!
जीत हूँ दिन रात डर डर के
सहमे सहमे खुशियाँ मनाता हूँ
मान-सम्मान मेरा सब कुछ
उसके दम पे शीश उठाता हूँ !!
बना रहे मेरा विश्वास अडिग
अगर जीवन में सफलता वो पाती
जग से कह सकूंगा उठा शीश मैं
हाँ बेटे से प्यारी मुझे मेरी बेटी है
फूलो जैसे उसको संवारा
आँगन सदा जो महकाती है
अनमोल रत्न मेरे जीवन का
वो मेरे घर की अपनी बेटी है !!
वो मेरे घर की अपनी बेटी है !!
वो मेरे घर की अपनी बेटी है !!